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    नारी: एक अशाधारण रचना

    नारी एक परमात्मा की बनायी गयी अदभुत रचना हैं. शारीरिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि मानसिक, अंदरूनी ताकत, स्वभाव, विचार, भावना, सहनशीलता और क्षमता के दृष्टिकोण से. नारी एक शक्ति हैं जो त्याग, बलिदान, ममता और संतोष की देवी हैं. नारी सम्मान हैं, अभिमान हैं, जननी हैं. नारी जन्मदात्री और फलदायनी हैं. परमात्मा ने नारी को […] More

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    अगर आपको ज्यादा आलस्य या सुस्ती आ रही हैं तो हो जाईये सावधान और जानिये क्या है लक्षण

    1. पहला लक्षण: आप हमेशा विचारों में खोये रहतें हैं सुस्ती या तो भोजन के अधिक सेवन से या विचारो के अधिक मात्रा में सेवन करने से आती हैं शायद आप ये सोचे की विचारों के अधिक सेवन से आलस्य कैसे आयेंगा हालांकि हर कोई ये तो समझ सकता हैं की भोजन के अधिक सेवन […] More

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    कविता: मेरे आंखों के ख्वाब

    मेरे आंखों के ख्वाब जैसे कागज की कश्ती ये दुनिया-संसार जैसे अम्ल का समंदर एक तन्हा सा दिन जैसे कुदरत बैरागी इक गुमसुम सी रात जैसे हारा सिकंदर एक पागल सा दिल बड़ा जिद्दी, जज्बाती लिए फिरता है आग हर वक्त खुद के अंदर सांसों के सिरों से बंधी तू थी, मैं था वादे थे […] More

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    कविता: ख़ैबर-पख़्तून

    ख़ैबर-पख़्तून लम्हें जैसै गुजरते चले जा रहे हैं ख्वाब आंखो से झड़ते चले जा रहे हैं हमको तो लेकर सहर लौटना था हम उल्टे सफर क्यूं चले जा रहे हैैं ख्वॉब ख़ैबर-पख़्तून धुन मिर्गी सी धुन, वाह दिन सीरिया-इराक रात..खूनी रंगून नच ओ बागड़-बिल्ले नच ओ वहशी बबून नच ले, नच ले ख्वाबो को रच […] More

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    कविता: मुरझा कर फूलों का गिरना

    मुरझा कर फूलों का गिरना टूटी शाखें देख रही है्ं वो शमशान से उठता धूआँ बहती राखें देख रही हैं अंधी आंखे देख रही हैं घूप्प सलाखें देख रही हैं हम और तुम भी देख रहे हैं कैसे लाशों पर दल बल बनता है किसी पार्टी का चमक पताका तब जाकर कहीं उछलता है वो […] More

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    कविता: मुकम्मल आना

    मुकम्मल आना आना तो मुकम्मल आना वर्ना हम तन्हां ही सही हैं मिलकर ही सब बातें होंगी कहां सुकूं, कहां चैन नहीं है इक आह जो कब की गुजर गई हम आज भी लेकिन खड़े वहीं हैं खामोशी चुनने का मतलब हम लफ़्ज़ों से डरें नही हैं आओ मुझको पूरा कर जाओ हम सर से […] More

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