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नारी: एक अशाधारण रचना

नारी एक परमात्मा की बनायी गयी अदभुत रचना हैं. शारीरिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि मानसिक, अंदरूनी ताकत, स्वभाव, विचार, भावना, सहनशीलता और क्षमता के दृष्टिकोण से. नारी एक शक्ति हैं जो त्याग, बलिदान, ममता और संतोष की देवी हैं.

नारी सम्मान हैं, अभिमान हैं, जननी हैं. नारी जन्मदात्री और फलदायनी हैं. परमात्मा ने नारी को एक अद्भुत क्षमता दी हैं. जिससे नारी समय आने पर दुर्गा, काली, सीता, सरस्वती, द्रौपदी और रानी लक्ष्मीबाई हमेशा से बनती आई हैं.

समय आने पर नारी दुष्टों का संहार, राझसो का बध, सुखो का त्याग, अज्ञानियो को ज्ञान, बेइज्जत करने वालो को सजा, अत्याचार करने वालो पर वार करने का सामर्थ हमेशा से रखती आई हैं. नारी के अन्दर एक ऐसी ताकत छिपी हैं जिसकी अगर हर नारी को पहचान हो जाए तो वो गुलामी की जंजीरों से जकड़ी नहीं जाएगी.

आजाद पक्षी की तरह अपने ताकत को खुले आसमान में आजमाएगी और उसका लुफ्त उठाएगी.

हर नारी अपने शौर्य, साहस, पराक्रम से जल-थल, आकाश, अंतरिक्ष में परचम लहराने वाली हैं. पर्वत पहाड़ का सीना चीर के आगे बढ़ने वाली हैं | लेखक, राजनीतिज्ञ, चिकित्सक, अभियंता, समाज शास्त्री, वैज्ञानिक, व्यापारी, कलाकार इत्यादि हर शास्त्र की रजिया बनने वाली हैं.

हर नारी अगर ठान ले तो अपने अन्दर से एक नहीं ऐसे कई रजिया को जन्म दे सकती हैं.

तोड़ दे जंजीरों को, छोड़कर बाधाओं को पिछे आगे बढ़.
उठ खड़ी हो, पंख फैला, ताकत दिखा, आसमा में उड़.

लेख: अंकिता सिन्हा (उद्यमी, अभियंता और सामाजिक कार्यकर्ता)

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